कुर्सी कि महिमा
मानब समाज को सुचारु रूप से चलाने के लिए शासन व्यवस्था का बिकाश किया गया है। और ईस शासन ब्यबस्था को और अच्छे तरीके से चलाने के लिए बिभिन्न पद का सृष्टि किया गया है। कालांतर मे बिभिन्न देशो मे बिभिन्न प्रकार शासन ब्यबस्था का बिकाश किया गया है। कही राजतन्त्र तो कही समाजतन्त्र या कही पर गणतान्त्रिक शासन ब्यबस्था कायम कि गयी है। और ये शासन ब्यबस्था मे लोग अपने योग्यता अनुसार निर्बाचित होते है अथबा नियुक्त किया जाता है। कभी कभी इन पद पर भ्रस्ट मानसिकता वाले लोग बैठते है फल स्वरूप शासन ब्यबस्था के बिरुद्ध बिभिन्न प्रकार आंदोलन होते रहते है।
और हमलोग देखे है बिभिन्न लोग इन पद का दूरप्रयोग करके अपना रुतबा कायम करते है। इन पद का दूरप्रयोग करके ही कई लोग बिभिन्न अपराध को अंजाम देता है। कई लोग बहुत बड़ा भ्रस्टाचार करते है। कई लोग इन पद या कुर्सी का दूरप्रयोग दूसरे का उपर जुल्म करने के लिए करते है। और इन पद या कुर्सी को पाने के लिए society मे होड़ लगी है। बिभिन्न दल या गुट इन कुर्सी मे आसीन होने के लिए बिभिन्न प्रकार षड्यंत्र रचते हैं। और इन षड्यंत्र मे आम जनता को बिभिन्न प्रकार प्रलोभन मे फसाया जाता है। मै ईस amazing poetry मे ईस कुर्सी कि महिमा को बताने कि प्रयास किया है। मुझे आशा है आप सभी ईस कबिता को एन्जॉय करेंगे।
कुर्सी कि महिमा
लोग मुझपर बैठते है, लोग मुझपर आराम करते है
लोग मुझे पेयार से कुर्सी बुलाते है।
नेताओं को है मुझसे पेयार, लोगोका मै हु सत्कार
कुर्सी के लिए सभी लड़ने को तैयार।
कुर्सी आन बान शान है, नेता गाते है कुर्सी कि जयगान,
कुर्सी कि महिमा अपरम्पार, कुर्सी के लिए कोई भी कुछ करने को तैयार।
कुर्सी कि महिमा गाये नेताजी, कुर्सी के साथ चिपके नेताजी,
कुर्सी कि है ऎसी माया कुर्सी के लिए खेल बिगाड़े नेताजी।
कुर्सी मे है अपार शक्ति, कुर्सी को नेता करें भक्ति
कुर्सी कि लालच मे हेराफेरी करें नेताजी।
कुर्सी मे है अपार माया इसीलिए चमचे बनाते है छाया,
सभी जगह है कुर्सी कि लड़ाई, कुर्सी कि महिमा गाये दुनिया।
कुर्सी के लिए क्या क्या कांड हुआ, दुनिया मे बहुत उथल पुथल हुआ,
एक से बढकर एक खेल हुआ, अनगिनत लड़ाई हुआ।
कुर्सी के लिए ही अनगिनत इतिहास हुआ,
कुर्सी कि खींचातान मे एक दूसरे का दुश्मन हुआ।
कुर्सी कि माया ऎसी लगी मानो कुर्सी माता, कुर्सी पिता कुर्सी ही परम तप,
कुर्सी के खातिर नेताजी करें कुर्सी नाम जप।
कुर्सी का साहारा लेके नेताजी करें नाना प्रकार लूट,
कुर्सी का साहारा लेके नेताजी बोले नाना प्रकार झूठ।
कुर्सी के लुटमार मची है, कुर्सी के लिए नेता चाल चालते है,
कुर्सी मे पकड़ बनाने के लिए नेताजी तरह तरह के बबाल करते है।
कुर्सी मे वह शक्ति है साधारण ब्यक्ति भी बन जाते है असाधारण,
तभी तो कुर्सी के लिए चतुर ब्यक्ति लोगोको बेबकुफ़ बनाते है।
कुर्सी के लिए सभी करें भोट, कुर्सी के खातिर बिकते है भोट,
कुर्सी को पाने कि खातिर नेताओं ने बरसाते है नोट।
कुर्सी का साहारा लेके भेड़ो के शेर बनते हुए देखा,
कुर्सी मे वह जादू है जो किस्मत को चमकते हुए देखा।
