अभीतक हमारे समाज मे कालांतर मे बहुत महान लोग आ चुके है। वह लोग अपने ज्ञान और बिचारो से दूसरे को प्रभाबित करके मानब समाज को आगे बढ़ने के लिए मदद किया है। वह लोग अपना experience को बिभिन्न लेखनी के माध्यम से हमे बताने कि प्रयास किया है। सामाजिक परिबर्तन और लोगोका ब्यबहार मे जो परिबर्तन आ रहा है बहुत सारे लेखक, बुद्धिजीवी हमे बताने कि प्रयास कर रहे है। मेरा ईस amazing poetry मे मै आँखो देखा कुछ बाते बताने कि प्रयास किया है।
जबसे मै होश मे आया इंसानों को लड़ते हुए देखा
मूर्खता मे जी रहे लोगोंको बर्बाद होते हुए देखा।
कही बाप बेटे कि लड़ाई तो कही संपत्ति कि लड़ाई,
हर गली मोहल्ले कि जातिदंगा को देखा।
आम लोगोका जीबीका कि लड़ाई और कुछ लोगोका इच्छुपूर्ति कि लड़ाई
अशांत दुनिया मे कुछ लोगो का शांति खोजने कि लड़ाई।
सत्ता धारिओ कि सत्ता का नशा और देशद्रोहिओं का बेंगो विद्रूपता
सर चढ़कर बोल रहे है, आम जनता तड़प रहे है।
नेताओ को लोगोंको बेबकुफ़ बनाते हुए देखा, झूठे झूठे बादे करते हुए देखा
झूठे और मक्कार नेताओ कि चक्कर मे आम लोगो को पीसते हुए देखा।
कथाकार को कथा बेचते हुए देखा और अच्छा अच्छा बात
बोलनेवाला अंदर से खोखला लोगो को देखा
जिंदगी कि राह मे मै राहगीर को देखा
कुछ लोग बिना छत के सोते है, उनलोगो का कठिनाइयों को देखा।
झूठ फरेब करते हुए उन शातिर लोगो को देखा,
शतरंज कि चाल चालनेवाला उन लुटेरों को देखा।
जिंदगी मायने नहीं रखता उन लोगो मे जो ऊपर से इंसान है बस अंदर से शयतान,
मायने नहीं रखता उनके इज्जत जिनके पास कुछ नहीं होता।
कितना भी मीठा बात बोल लो दुनिया कि सच्चाई युही दिख जाता।
इज्जत क्या होता है पेट कि खातिर छोटे बच्चे को गोद मे लिए उन मा को भीख मांगते हुए देखा,
बिकते है इज्जत बड़े आसानी से दूसरे का बिस्तर गरम करनेवाली उन बालाओ को देखा।
शोषण कि हद हो गई अच्छा चेहरे पे बहुरुपिया नजर आई
किसके बातो पे भरोसा करें इसलिए सबका card बन गई।
धर्म अधर्म कि लड़ाई मे हरेक का गुट बन कोई तो सच्चा कोई तो झूठ बन गई,
गुटों कि भरमार मे कौन सच्चा और कौन झूठा ये तय करना मुश्किल हो गई।
गुटों कि गुट मे अंतर्जतिक खेल बने, कोई तो गुलाम कोई मसीहा बने,
गुटों कि राजनीती हरेक को करते हुए देखा, एक दूसरे को मात देते हुए देखा।