मेरे पास एक चमत्कारी कलम था

 मेरे पास एक चमत्कारी कलम था पार्ट 2

लेखक बर्ग ने समाज की भलाई के लिए अपनी लेखन शैली का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। लेखक द्वारा बिभिन्न समय लिखे गये बिभिन्न रचना हमे और बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरणा देता है। इसके अलाबा मानबीय मूल्य को बनाये रखने के लिए लेखक समाज की बहुत बड़ी भूमिका है। कालांतर मे society मे बिभिन्न प्रकार कलह होते रहते है अथवा कई बिकृत मानसिकता के लोग समाज को पथभ्रष्ट करने मे लगे रहते है। वही समाज मे बिभिन्न समय बिभिन्न प्रकार बुराई पैदा होता है।

इन बुराई को कम करने के लिए भी लेखक बर्ग महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है। आज भी हमारे समाज मे बहुत सारे लोगो का उपर बिभिन्न तरीके से अन्याय अत्याचार होता है। उन पीड़ित लोगो का भी आबाज उठाने के लिए लेखक बर्ग का भूमिका महत्वपूर्ण होता है। साथ ही किसीभी समाज का कला का बिकास के लिए भी लेखक बर्ग भूमिका निभाते है। और बिभिन्न देशो मे culture का आदान प्रदान के लिए भी लेखक बर्ग सेतु का भूमिका निभाते है।

ईस सुन्दर और amazing poetry मे लेखक द्वारा समाज मे कार्य को बताने की प्रयास किया है। ये देखा गया है जिन लोगो मे लेखन शैली एक बार पूर्ण रूप से बिकाशित होता वह लोग अपने लेखन शैली को प्रयोग करके संसार मे नाम और शोहरत को हासिल कर सकता है। हमलोगो को भी उन बिख्यात लेखक बर्ग का experience को लेकर बेहतरीन मानब के रूप मे स्थान बनाना चाहिए। और समाज को बेहतर ढंग से चलाने के लिए कारीगर के रूप मे काम करना चाहिए।

मेरे पास एक चमत्कारी कलम था पार्ट 2

मेरे पास वह चमत्कारी कलम था,

मैं एक साधारण पैदा हुआ था, लेकिन मै एक होनहार बना।

मैं वो शायर था और सबको शायरी सुनाता था।

उस चमत्कारी कलम से मैंने वह कविता लिखी,

भरे सभा ने मुझे ताज पहनाया।

ऐसी चमत्कारी कलम की कहानी क्या कहूँ दोस्त,

उस चमत्कारी कलम ने मेरा भाग्य लिखा था।

उस चमत्कारी कलम से जब मैंने राजा के बारे मे लिखा था,

जो सूक्ष्मतम वस्त्रों की तलाश में था,

वह राजा सूक्ष्म वेश धारण कर अपना दंभ भरता था।

उस मासूम बच्चे ने राजा से कहा कि तुम्हारे कपड़े कहाँ हैं।

उस कलम से जब मै लिखा था न्याय अन्याय कि बाते,

न्याय बहुत दुर्लभ है मित्र, न्याय की देवी की आंखों पर पट्टी बंधी है।

उस खास कलम ने मुझे प्रेरणा दिए, लिखा था भ्रस्टाचारी का पोलपट्टी कि कथा,

सनसनी ऐसे फैल गई, उन लोगो के मै दुश्मन बन गई।

उस चमत्कारी कलम से जब मैंने लिखा था गरीब दुखी कि बाते,

चेहरे पे उनके खुशियाँ देखे, आँखो मे उनके ख़ुशी का आँशु देखा।

लेखनी कि धार ने वह क्रांति लाई, दुनिया मे मेरा नाम रोशन हुई,

मै जी रहा था प्रदीप का निचे अंधकार कि तरह, आज मेरा नाम अमर हुई।

जमा हुआ जल नष्ट होता है, शुद्ध रहने के लिए जल को बहते रहना चाहिए,

इसी प्रकार समाज के विचारों को शुद्ध रखने के लिए लिखते रहना चाहिए।




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