युद्ध नहीं शांति चाहिए

 युद्ध नहीं शांति चाहिए

जबसे मानब ने समाज के रूपमे स्थापित किया और संसार मे बिभिन्न मानब समाज बने है। बिभिन्न मानब समाज अपना अपना संस्कृति, बिचार और भाषा के साथ जी रहे है। और इन समाज ने समय समय पर अपना भाषा, संस्कृति और बिचार के लिए अथवा दूसरे का उपर अपना बिचार थोपने के लिए युद्ध का ही रास्ता अपनाया। और ईस युद्ध मे human society का बहुत बड़ा हानि पंहुचा है।

रक्तरंजीत इतिहास ने हमे कईओ ऐसे बिलुप्त मानब समाज कि जानकारी देता है। आज भी हमारे ईस दुनिया बहुत सारे संकट से गुजर रहे है। और ईस टकराब के लिए बिभिन्न समाज, धर्म, बिचारो मे मेल ना होना। दुनिया मे शांति, सौहार्द और भाईचारा को बढ़ाबा देने के लिए शुभबुद्धि सम्पन्य मानब को आगे आना चाहिए। हमने  देखा पहला और द्वितीय world war मे बहुत बड़ा जनधन का हानि पंहुचा है। इसके अलाबा भी बिभिन्न देशो मे गृहयुद्ध के कारण बहुत बड़ा जनसंहार हुआ है।

कभी कभी दो या अधिक देशो के बिच मे भी आपसी सीमा बिबाद के कारण युद्ध या झराप होते रहते है। बिभिन्न जाति, धर्म और समुदाय के बिच मे भी लड़ाई दंगा के कारण मानब समाज का बहुत बड़ा नुकसान पहुंच रहा है। दुनिया मे सामूहिक शांति के लिए हम सभी को प्रयास करना चाहिए। दुनिया मे शुभबुद्धि और सकारात्मक बिचार को बढ़ाबा देने के लिए हम सभी को आगे आना चाहिए। दुनिया आज तीसरा विश्वयुद्ध कि और बढ़ रहे है। और ये भी इतिहास रहा है युद्ध किसीभी समस्या के लिए समाधान का बिकल्प नही रहा है। 


युद्ध नहीं शांति चाहिए

सोचा था कुछ बाते लिखा जाय, इंसानियत का पहल किया जाय,

संसार को शांति का सन्देश दिया जाय, इंसानियत को जिन्दा किया जाय।

युद्ध का बिगुल बज चुकी है, रणभूमि सज चुकी है।

चारो ओर शोर मची है, इधर उधर भागदर मची है।

कहा किसके जान बची है, किसके लिए किसीका फिकर बची है।

जान इतना सस्ता हो गए, एक दूसरे का दुश्मन हो गए।

कातारों मे लोग मर गए, हज़ारो अनाथ हो गए।

साहारा का बेसहारा हो गए, सुन्दर ये शहर खंडहर बन गए।

वह प्यारा जमीन खून से लाल हो गए, वह जमीन युद्धभूमि बन गए।

इंसान से इंसान लड़ते गए, युद्ध कि बिभिसीखा बढ़ते गए।

इंसानियत का हत्या होते गए, कोई भी मसीहा नही आए।

बिबेक उनके मर गए, वह लोग युद्ध पीपासु बन गए।

सृष्टि को नस्ट करने मे लगे हुए है, वही लोग इंसानियत का दुश्मन बने है।

सभी ने उलझ पड़े है, एक दूसरे को पिट रहे है।

जीबन का प्रदीप बुझा रहे है, चारो ओर आग लगी है।

युद्ध के खिलाफ बोलेगा कौन? युद्ध को रोकेगा कौन?

आपसी बिबाद मिटाएगा कौन, भाईचारा का सन्देश देगा कौन।

आपसी बिबाद मिटाना चाहिए, शांति का सन्देश देना चाहिए।

शांति का सन्देश देगा कौन, इंसानियत को बचाएगा कौन?

शांति का कबूतर उड़ाएगा कौन, शांति का मसीहा बनेगा कौन।

सुन्दर ये धरती बचाना चाहिए, सभी को एक सूत्र मे कहना चाहिए।

युद्ध नही शांति चाहिए,

युद्ध नही शांति चाहिए,

युद्ध नही शांति चाहिए।

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