जीने कि कला चाहिए

 जीने कि कला चाहिए

मानब जीबन सच मे बहुत सुन्दर और रोमांचकारी है। मानव जीवन मूल्यों, विचारों और कला से परिपूर्ण है। हमें अपने जीवन में विभिन्न समस्याओं से गुजरना पड़ता है। और इन समस्याओं को दूर करने के लिए हमें काफी प्रयास करते है।और इन प्रयासों में हमारा कुछ उद्देश्य है। अच्छा जीवन जीने के लिए, समाज में उच्च स्थान पाने के लिए हमें जीवन में कला की आवश्यकता होती है। मेरे इस लेख या poetry में आप जानेंगे कि जीवन में कला की आवश्यकता क्यों है, कला क्या है। कला के बिना जीवन का कोई महत्व नहीं है। दुनिया में बहुत से लोग अद्भुत गुणों के साथ पैदा होते हैं और हमने देखा है कि कई लोगों ने अपने अंदर यह गुण पैदा करके नाम और प्रसिद्धि हासिल की है।

यह जरूरी नहीं कि किसी का जन्म कहां हुआ हो. कला को महसूस करना जरूरी है. कला को वास्तविक रूप देना आवश्यक है। कला ईश्वर की ऐसी कृपा है कि यह जिस भी व्यक्ति को मिल जाती है, उसके चारों ओर खुशियाँ ही खुशियाँ होती हैं। कलाकारिता इंसान को उस मुकाम तक ले जा सकती है और उसका नाम अमर कर सकती है। कला के experience से व्यक्ति को निपुणता प्राप्त होती है, वही artists कहलाता है।


जीने कि कला चाहिए
संघर्ष कि मैदान से भागना नही चाहिए और अच्छी सेहत

बिचारो के लिए जीने कि कला चाहिए।

जीते है इंसान तजुर्बे से, मिलते है कुछ तजुर्बे से,

अगर जीबन मे तजुर्बा ना हो सब कुछ बेकार है।

कुछ तो अपना चाहिए, कुछ तो खास चाहिए,

जीबन मे कुछ खुशियाँ चाहिए, कुछ तो अंदाज़ चाहिए।

मिलते नही आसानी से हर संघर्ष इम्तेहान लेता है,

हर संघर्ष मे कामियाबी के लिए जितने कि कला चाहिए।

कला वह खास है, कला वह अहसास है,

कला ही वह जीबन है जीनेवाले कई खास है।

जीबन कि अहसास ने हर मोड़ पे घुमाते है,

जीबन कि वह कला है हर मोड़ पे जान डालते है।

जीबन इतना सुन्दर है अहसास करके देखो,

जीबन मे इतना कला है कुछ समझ के तो देखो।

जिनके जीबन मे कला आ जाय हर पल खुशियाँ छा जाय,

कला ही वह खुबिया है हर तरफ छा जाय।

कला ही उत्साह है, कला ही खास है,

कला ही वह अंदाज है, कला ही अहसास है।

जीनेवाले जीते है खा पी के सो जाते है,

एक वह कलाकार है जो खास अंदाज मे जीते है।

किसीका होता है बोलने कि कला,

किसीका होता लिखने कि कला,

किसीका होता है कुछ भी करने कि कला।

कईओ ऐसे कलाकार हुए जो जिए है अपने अंदाज मे,

कईओ ऐसे कलाकार हुए संसार मे अपना नाम ऊंचा किए।

जिसे अपना नाम चाहिए, संसार मे ऊंचा मुकाम चाहिए,

ऐसे वह ना जिए, उसे जीबन जीने के लिए कला चाहिए।

कला ही मनन है, कला ही चिंतन, कला ही आत्मज्ञान है,

कला ही सृष्टि है, कला ही आत्मा, कला ही परमात्मा है।


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